tag:blogger.com,1999:blog-30781024.post115227007315835978..comments2007-08-17T23:57:14.340-07:00Comments on राजस्थली: पधारो साSagar Chand Naharhttp://www.blogger.com/profile/13049124481931256980noreply@blogger.comBlogger6125tag:blogger.com,1999:blog-30781024.post-76824627765496196782007-08-17T23:57:00.000-07:002007-08-17T23:57:00.000-07:00थारो मारवाड़ी लेखण मन माँ समायग्यो। आपणो ईमेल रो ठ...थारो मारवाड़ी लेखण मन माँ समायग्यो। आपणो ईमेल रो ठिकाणो कोनी दियो प्रोफाइल माँय। पुराणी राजस्थानरी मुड़िया/महाजनी लिपि रा खाता-बही क बार मँ कुछ जाणकारी चायै है।हरिरामhttp://www.blogger.com/profile/12475263434352801173noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30781024.post-47671298855653708772007-08-12T09:03:00.000-07:002007-08-12T09:03:00.000-07:00सागर जी सबसै पल्या म्हे थानै ब्याह की बधाई देवल्य...सागर जी सबसै पल्या म्हे थानै ब्याह की बधाई देवल्या पाछे कवांगा की म्हे थाने छोड़ कर कठै जा सका था...कविता सै रूठ कर कुछ नही कर सकां...<BR/><BR/>सुनीता(शानू)sunita (shanoo)http://www.blogger.com/profile/11804088581552763781noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30781024.post-92078820493068312832007-05-16T23:26:00.000-07:002007-05-16T23:26:00.000-07:00सागर जी, राजस्थानी चिठ्ठा पढ़ कर बहुत अच्छा लगा......सागर जी, <BR/><BR/>राजस्थानी चिठ्ठा पढ़ कर बहुत अच्छा लगा..... अनोखे प्रयास के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं...<BR/><BR/>नीरजनीरजhttp://www.blogger.com/profile/10138566174721262901noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30781024.post-1157786824379798042006-09-09T00:27:00.000-07:002006-09-09T00:27:00.000-07:00नाहर जी सगलाऊ पैंला तो मैं थाने बधाई देणी चाहूँ , ...नाहर जी सगलाऊ पैंला तो मैं थाने बधाई देणी चाहूँ , थे स्वीकार करज्यो।<BR/>आपणी राजस्थाणी रो पोट्लो देख हर मारो मन हरख सूँ फुदकण लाग गयो ॰॰॰ <BR/>आपां इँयाही लिखता रीय्या तो एक दिन इस्यो भी आवेलो जद् आपणी भाषा री भी एक समुह पोट्ली बणेली अर् बीके मांय १००० सूँ भी ज्यादा पोट्ला हुवेला ॰॰॰<BR/>थे बस लिखता रओ।गिरिराज जोशीhttp://www.blogger.com/profile/13316021987438126843noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30781024.post-1152581839001178852006-07-10T18:37:00.000-07:002006-07-10T18:37:00.000-07:00थे ओ कोनी लिख्यो क देवगढ़ मँ वी पी सिंग को सासरो भी...थे ओ कोनी लिख्यो क देवगढ़ मँ वी पी सिंग को सासरो भी ह :)। <BR/><BR/>मँ आसिंद ओर देवगढ़ गएड़ो ओर पाँच-दस दिन रहेड़ो हूँ और बिना संकोच के कह सकूँ हूँ कि आजतक आँ दोनूँ जिग्याँ से बढ़िया मेहमाननवाजी कठ ई कोनी देखी। भोत ई भळा लोग। भूल कोनी सकूँ। <BR/><BR/>पढणिया घणा ई ह। थे बस लिखता रओ।Vinayhttp://www.blogger.com/profile/15852246114055715955noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30781024.post-1152365964514130382006-07-08T06:39:00.000-07:002006-07-08T06:39:00.000-07:00भाईसा चोक्खो लिखो हो थे. इँयाही लिखता रीय्या. और ए...भाईसा चोक्खो लिखो हो थे. इँयाही लिखता रीय्या. और एक बात कैदुँ आपने, सन्यास वन्यास के फेर मँ मति पड्या ना अब्ब.Pankaj Benganihttp://www.blogger.com/profile/16827038594045459910noreply@blogger.com