Friday, July 07, 2006

पधारो सा

सघळां राजस्थानी अने राजस्थानी भाषा रा जाणकार भाई बहेनों ने राम राम सा, अने जय जिनेन्द्र!
राजस्थान मतल्ब राजपूत वीरां री भूमि जठे महाराणा प्रताप जेड़ा राजा अने भामाशाह जेड़ा देश भक्त हुई गया है।
मारो जन्म राजसमन्द जिल्ला रा देवगढ़ गाँव मां हुयो, देवगढ़ सिरियारी रा कने (२९ कि मी) है, जठे तेरापंथ रा पहेला आचार्य भिक्षु री समाधी है। घर मां बोला हां मेवाड़ी पण लिखबा को जर काम पड़े तो मारवाड़ी लिख ल्यां।
हिन्दी मां चिठ्ठाकारी करता करता एक दिन मन मां विचार हुयो के आपणी भाषा मां पण ब्लॉग/ चिठ्ठो होणो चाहिजे, अने आपनी सामे प्रस्तुत है आ राजस्थानी ब्लॉग।
टाबर था जर घर मां माणक आवती थी,पापाजी ने माणक रो घणों शोख। मारी मोटी बहेन रा जर लग्न हुया तो पापाजी कूँकुम पत्रिका पण मारवाड़ी मा बणावी, जीरो मेटर कईक यान थो-
मारी लाडेसर "सविता" रो शुभ ब्याव कुचामण सिटी रा सेठ ...... रा सुपुत्र अबीर चन्द जी साथे होवण रो तय हुयो है सो आप सघळा वेळासर पधारजोसा ।
जीजी रा ब्याव पछी तो जर मारो ब्याव हुयो तो मारी पत्रिका पण मारवाड़ी मां बणी थी।
खैर सघळी बात आज करस्यां तो पछी कांई करस्यां !!!!
आप सघळां ने मारी अरज है के आप पण जे कांई लिख सको हो लिखबा रो पयत्न करो कांई मदद री जरूरत हो तो म्हाने संपर्क कर सको।
सागर चन्द नाहर
संजय बेंगानी

6 comments:

Pankaj Bengani said...

भाईसा चोक्खो लिखो हो थे. इँयाही लिखता रीय्या. और एक बात कैदुँ आपने, सन्यास वन्यास के फेर मँ मति पड्या ना अब्ब.

Vinay said...

थे ओ कोनी लिख्यो क देवगढ़ मँ वी पी सिंग को सासरो भी ह :)।

मँ आसिंद ओर देवगढ़ गएड़ो ओर पाँच-दस दिन रहेड़ो हूँ और बिना संकोच के कह सकूँ हूँ कि आजतक आँ दोनूँ जिग्याँ से बढ़िया मेहमाननवाजी कठ ई कोनी देखी। भोत ई भळा लोग। भूल कोनी सकूँ।

पढणिया घणा ई ह। थे बस लिखता रओ।

गिरिराज जोशी said...

नाहर जी सगलाऊ पैंला तो मैं थाने बधाई देणी चाहूँ , थे स्वीकार करज्यो।
आपणी राजस्थाणी रो पोट्लो देख हर मारो मन हरख सूँ फुदकण लाग गयो ॰॰॰
आपां इँयाही लिखता रीय्या तो एक दिन इस्यो भी आवेलो जद‌् आपणी भाषा री भी एक समुह पोट्ली बणेली अर् बीके मांय १००० सूँ भी ज्यादा पोट्ला हुवेला ॰॰॰
थे बस लिखता रओ।

नीरज said...

सागर जी,

राजस्थानी चिठ्ठा पढ़ कर बहुत अच्छा लगा..... अनोखे प्रयास के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं...

नीरज

sunita (shanoo) said...

सागर जी सबसै पल्या म्हे थानै ब्याह की बधाई देवल्या पाछे कवांगा की म्हे थाने छोड़ कर कठै जा सका था...कविता सै रूठ कर कुछ नही कर सकां...

सुनीता(शानू)

हरिराम said...

थारो मारवाड़ी लेखण मन माँ समायग्यो। आपणो ईमेल रो ठिकाणो कोनी दियो प्रोफाइल माँय। पुराणी राजस्थानरी मुड़िया/महाजनी लिपि रा खाता-बही क बार मँ कुछ जाणकारी चायै है।